हक़ीक़त जिंदगी की समझने लगा हूँ

हक़ीक़त जिंदगी की समझने लगा हूँ,

ख़ुद की मस्ती में अब रहने लगा हूँ,

यहाँ कोई अपना न कोई पराया है,

इसी सच्चाई से जीवन जीने लगा हूँ।

राही!!!

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